इतिहास
इस गूल्डी ग्राम पंचायत का निर्माण सन् 1962 में हुआ था इस ग्राम पंचायत में केवल दो ही गाँव आते है पहला स्वयं गूल्डी और दूसरा मठीयान गाँव! यह पंचायत बड़ी नही है इस पंचायत में दो गाँव होने की वजह से इस गाँव की आबादी भी कम है एवं यहाँ पहाड़ों पर खेती होती है तथा यहाँ पर बाग-बगीचे भी है जिनमे फल मिलते है जो की गाँव के लोगो के खाने के काम आते है! यहाँ जंगली जानवरों का भी आना-जाना लगा रहता है अतः गाँव के लोगो को भय बना रहता है की कंही उनके बच्चों को कोई जानवर ना ले जाए! यह ग्राम पंचायत ब्लॉक चम्बा, जिला टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड के अंतर्गत आता है यहाँ का वातावरण बहुत ही सुहाना होता है!
यह ग्राम पंचायत टिहरी जिले के नगर पंचायत चम्बा के समीप तथा चार धाम यात्रा मार्ग पर स्थित है! इस ग्राम पंचायत के कमांडेड श्री नत्थू सिंह सज्वान जी टिहरी रियासत के राजा के प्रथम कमांडेड नियुक्त हुए तथा इस गाँव में तीन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हुए है
१ श्री सुंदर सिंह सज्वान
२ श्री धूम सिंह सज्वान
३ श्री रघुवीर सिंह सज्वान
इन्होने देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद करने के लिए आजाद हिंद फ़ौज में भर्ती होकर आदम्य साहस का परिचय दिया! ग्राम पंचायत गुल्डी में ७०% व्याक्ति भारतीय सेना से सेवा निवृत हो चुके है! इस गाँव में वर्तमान में शिक्षा विभाग में १५ शिक्षक कार्यरत हैं, तथा इस गाँव को विकास की दिशा में ले जाने में सभी बुजर्गों, नौजवानों महिला व पुरुषों का पूर्ण योगदान रहता है! इस गाँव का उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने में एक अहम योगदान रहा है यंहा के नौजवान श्री मंजीत सिंह सज्वान ने १४ वर्ष की आयु में १४ दिनों तक मैनपुरी इटावा उत्तर प्रदेश में सरकार के प्रति रोष व्यक्त कर अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर अपनी गिरफ्तारी दी थी, तथा अलग राज्य उत्तराखंड बन जाने के बाद सरकार ने उन्हें उत्तराखंड आंदोलनकारी की पदवी से नवाजा है! इस गाँव ने शिक्षा के छेत्र में कई झंडे गाड़े! यंहा से २०११ में शिक्षा विभाग से निकली एल टी की नियुक्ति में लक्ष्मण सिंह सज्वान ने बाजी मार कर गाँव का नाम रोशन किया तो प्रदीप सिंह सज्वान ने संयुक्त सेवा परीक्षा में पुरे भारतवर्ष में ७८ वीं रैंक पाकर गाँव का गाँव का नाम रोशन किया, तथा नियुक्ति जनवरी २०१२ में आई एम ए में होनी है, इस गाँव का स्वरोजगार की दिशा में भी अहम योगदान है!
यंहा के वर्तमान प्रधान श्री सोहन सिंह सज्वान ने प्रधान बनते ही ग्राम सभा की महिलाओं को खादी ग्रामोध्योग संस्था ढालवाला ऋषिकेश के द्वारा सम्पर्क कर जूट से बनने वाले सामान की ट्रेनिंग दिलाई, जिससे आज गाँव की १५ महिलाएं कच्चे जूट से बैग हेंडलूम, मोबाईल, पर्श, स्कूल बैग इत्यादि तयार कर बाजार में बेचती हैं तथा उससे आय प्राप्त कर अपने व्यवसाय को बड़े स्तर पर कर रही है और साथ ही अपने परिवार की आय में भी अपना योगदान दे रही है! समस्त ग्राम वासियों की महिला मंगल दल, युआ मंगल दल के साथ मिल कर गाँव की बेकार पड़ी भूमि पर फलदार पेड़ लगाकर तथा फूलों का उत्पादन कर गाँव की आय के स्रोत बढाये है तथा फूलों से इस ९०० रुपए ग्राम सभा की आय में जुटाए हैं!
समस्त ग्राम वासियों के सहयोग से प्रति तीन वर्ष में माँ दुर्गा के अस्तमि पूजन का कार्य संपन किया तथा प्रत्येक वर्ष गाँव के कुल देवता श्री घंटाकर्ण महादेव के मंदिर गजा में गाँव के कई सज्वान जाति के लोग गौमुख से जल लाकर कुल देवता का जलाभिषेक करते हैं! इस दिन समस्त ग्रामीण ढोल-बाजों सहित कुल देवता के मंदिर जाकर संयुक्त रूप से भंडारा करते हैं!